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जिन्दगी - गजल

Posted On: 8 Feb, 2013 में

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बिन मांगे जो मिली है, बिन चाहे जो खो जायेगी
दो तारीखें यादों की बन, जिन्दगी सो जायेगी

कुछ पाने के गुमां हैं और कुछ हैं खोने के मलाल
इक मढी तस्वीर है और क्या जिन्दगी हो पायेगी

हाशिये पर आ गये हैं दुनिया भर के मजमून
यूं ही सफ़ा-दर-सफ़ा कोरी जिन्दगी हो जायेगी

पास में रखने को कुछ है और न छोडने की बात
सांसों पर मयस्सर कहां तक जिन्दगी ढो पायेगी

इतनी यादों के पुल्लिन्दे अपने साथ ले कर न चलो
मुश्किल सफ़र होगा और बोझ जिन्दगी हो जायेगी

मोहिन्दर कुमार



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
February 12, 2013

जीन्दगी के भाव पर लिखी रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    Mohinder Kumar के द्वारा
    February 21, 2013

    आभार अशोक जी.

shashibhushan1959 के द्वारा
February 10, 2013

आदरणीय मोहिन्दर जी, सादर ! खूबसूरत भाव भरी रचना !

    Mohinder Kumar के द्वारा
    February 21, 2013

    धन्यवाद शशीभूषण जी.

jlsingh के द्वारा
February 10, 2013

इतनी यादों के पुल्लिन्दे अपने साथ ले कर न चलो मुश्किल सफ़र होगा और बोझ जिन्दगी हो जायेगी! वाह मोहिन्दर कुमार जी! बहुत ही सुन्दर!

    Mohinder Kumar के द्वारा
    February 21, 2013

    रचना को पसन्द करने के लिये आभार ज्वाहर जी.

nishamittal के द्वारा
February 9, 2013

बहुत सुन्दर रचना

    Mohinder Kumar के द्वारा
    February 21, 2013

    स्नेह के लिये आभार निशा जी.

chaatak के द्वारा
February 8, 2013

बहुत खूब, ये तो वैलेंटाइन का एक खूबसूरत तोहफा प्रतीत होता है!

    Mohinder Kumar के द्वारा
    February 21, 2013

    रचना पसन्द करने के लिये आभार चातक जी.


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