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वो दिन कब आयेगा - कविता

Posted On: 27 Nov, 2012 में

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वो दिन कब आयेगा
नैन तेरे जब पढ लेगें
मूक मेरे स्वप्नों की भाषा

वो दिन कब आयेगा
जब चेहरे पर पडी लट को मैं
अपने इन हाथों से सुलझाऊंगा
ठोडी को तेरी उठा किंचित
आंख से आंख मिलाऊंगा

वो दिन कब आयेगा
अधरों से जब अधर मिलेंगे
मकरन्द बहेगा अवरिल
स्वासों में इक ज्वार उठेगा
धडकन गायेगी पंचम

वो दिन कब आयेगा
जब सीने लग तुम स्वंय कहोगी
पूर्णता की चाह मुझे है
छा जाओ तुम मन धरा पर
बरसो मुझ पर तुम भर्राकर

वो दिन कब आयेगा
जब भूल कर देखा स्वप्न पुराना
आवाहन दोगी आते पल को
कडवी सारी यादें विसरा कर
चखोगी फ़िर किसी मीठे फ़ल को

वो दिन कब आयेगा
स्वप्न तेरी आंखों के जब
मुझसे साझे हो पायेंगे
झरते पत्तों की भुला विसात को
ये मरु फ़िर बगिया हो जायेंगे

वो दिन कब आयेगा

मोहिन्दर कुमार
http://dilkadarpan.blogspot.com



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38 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
December 22, 2012

मोहिन्दर जी, सुंदर ,मधुर ,भावनात्मक अभिव्यक्ति हेतु बहुत वधाई व् शुबकामनाएं …मेरे ब्लॉग पर ”त्याग से भगवत प्राप्ति ”….

    Mohinder Kumar के द्वारा
    January 10, 2013

    सुषमा जी, ब्लोग पोस्ट पसन्द करने के लिये आभार.

seemakanwal के द्वारा
December 15, 2012

बहुत सुन्दर प्रस्तुती हार्दिक आभार ,, सादर

    Mohinder Kumar के द्वारा
    January 10, 2013

    सीमा जी, ब्लोग पोस्ट पसन्द करने के लिये आभार.

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 12, 2012

वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार

    Mohinder Kumar के द्वारा
    December 13, 2012

    उत्साह वर्धन के लिये आभार मदनमोहन जी

    Mohinder Kumar के द्वारा
    December 13, 2012

    धन्यवाद अजय जी

yamunapathak के द्वारा
December 2, 2012

मोहिंदर जी आपकी सुन्दर सी कविता की प्रशनात्मक शीर्षक.इंतज़ार,आशा की शब्दावली ने बहुत आकर्षित किया.एक बेहतरीन कविता के लिए हार्दिक बधाई. साभार

    Mohinder Kumar के द्वारा
    December 5, 2012

    यमुना जी, उत्साहवर्धक शब्दों के लिये हार्दिक आभार.

yogi sarswat के द्वारा
November 30, 2012

जब सीने लग तुम स्वंय कहोगी पूर्णता की चाह मुझे है छा जाओ तुम मन धरा पर बरसो मुझ पर तुम भर्राकर वो दिन कब आयेगा भगवान् करे वो दिन जल्दी ही आये ! बहुत सुन्दर शब्द , श्री मोहिंदर कुमार जी ! गज़ब के शब्द और भाव

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 30, 2012

    योगी जी, सदा की तरह स्नेहा और उत्साहवर्धक शब्दोँ के लिये आभार

bhanuprakashsharma के द्वारा
November 30, 2012

आदरणीय मोहिंदर जी, सुंदर रचना है लिए बधाई स्वीकारें। 

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 30, 2012

    धन्यवाद भानूप्रकाश जी, स्नेह बनाये रखियेगा

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 30, 2012

…..अच्छी बात ……..वो दिन कब आयेगा

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 30, 2012

    यतिंदर जी, कितनी अच्छी यह कब पता चलेगा.

rekhafbd के द्वारा
November 29, 2012

आदरणीय मोहिन्दर जी , स्वप्न तेरी आंखों के जब मुझसे साझे हो पायेंगे झरते पत्तों की भुला विसात को ये मरु फ़िर बगिया हो जायेंगे वो दिन कब आयेगाबहुत सुंदर अभिव्यक्ति ,हार्दिक बधाई

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 30, 2012

    रेखा जी उत्साह वर्धन के लिये आभार.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 29, 2012

maanya bhaai mohinder jee , saprem namaskaar ! sapne to sapne hote hain ! mushkil se apne hote hain !! anuraag kee sugandh se labrez rachnaa ke liye haardik badhaai !

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 29, 2012

    माननीय विजय गुंजन जी, प्रेरणात्मक शब्दों के लिये आभार…. आपने सही कहा… सपने सपने हो कर भी कितनी आकर्षक होते हैं… पूर्णता प्राप्त कर वह कितन गौण हो जाते हैं…स्नेह बनाये रखियेगा.

Mohinder Kumar के द्वारा
November 29, 2012

विक्रम जी, वो दिन तो आये और गुजर भी गये बस उस पल को पन्नों पर उतारने में समय लग गया…. उत्साहवर्धक शब्दों के लिये आभार… स्नेह बनाये रखियेगा.

nishamittal के द्वारा
November 29, 2012

सदा की भाँती सुन्दर रचना पर बधाई आपको.

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 29, 2012

    स्नेह और उत्साहवर्धन के लिये आभार निशा जी.

Ravinder kumar के द्वारा
November 28, 2012

मोहिंदर जी, सादर नमस्कार. मन के भावों को व्यक्त करती सुन्दर कविता के लिए आप को बधाई. शुभकामनाएं.

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 29, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद रविन्दर जी.. स्नेह बनाये रखियेगा.

krishnashri के द्वारा
November 28, 2012

आदरणीय महोदय , सादर , भावों को सुन्दर शब्दों का बाना पहनाया है बधाई .

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 29, 2012

    उत्साह वर्धक शब्दों के लिये आभार क्रिश्नाश्री जी… स्नेह बनाये रखियेगा.

vikramjitsingh के द्वारा
November 28, 2012

आदरणीय मोहिंदर जी….सादर….. चिंता मत कीजिये…….’वो दिन’ जल्दी ही आएगा……बस आप ‘कोशिश’ जारी रखियेगा…….

akraktale के द्वारा
November 28, 2012

आदरणीय मोहिंदर जी                       सादर, सुन्दर रचना बधाई स्वीकारें.

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 29, 2012

    अशोक जी आपके उत्साह वर्धक शब्द मेरी लेखनी का सम्बल हैं. आभार.

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
November 28, 2012

मान्यबर ,जीती जागती रचना के लिये बधाई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,वो दिन कब आयेगा नैन तेरे जब पढ लेगें मूक मेरे स्वप्नों की भाषा वो दिन कब आयेगा जब चेहरे पर पडी लट को मैं अपने इन हाथों से सुलझाऊंगा ठोडी को तेरी उठा किंचित आंख से आंख मिलाऊंगा वो दिन कब आयेगा

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 29, 2012

    अनुराग जी उत्साह वर्धन के लिये आभार

jlsingh के द्वारा
November 28, 2012

वो दिन जरूर आएंगे!

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 29, 2012

    स्नेहिल शब्दों के लिये आभार जवाहर जी.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 27, 2012

आदरणीय मोहिंदर जी, सादर अभिवादन वो सुबह कभी तो आएगी ..वक्त का इन्तजार करिए हमें भी जिसका इन्तजार है वो जरूर आएगी. बधाई. आनंद आ गया.

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 29, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, ये तो बीते पलों के प्रतिबिम्ब हैं..कब के फ़लिभूत हो चुके बस कागज पर देर से उतरे.. स्नेह के लिये आभार.

sinsera के द्वारा
November 27, 2012

sundar kavita mohindar ji, badhai… lekin aap isse pahl isse uchch star ki likh chuke hain..(regret net prob)

    Mohinder Kumar के द्वारा
    November 29, 2012

    सरिता जी, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिये आभार.


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